जब उसी अवस्था में आजकल के बच्चे गलियों और बाजारों में खेलते फिरतें हैं। माताएं इस बात की चिन्ता भी नहीं करती कि उनका बालक कहां खेल रहा है? शिवाजी की माता अपने बच्चे को छिपाती थी और बड़ी सावधानी से उसको ऐसे स्थान पर रखती थी जहां से वह दुश्मनों के हाथ से बचा रहे। सन् 1636 ई. तक शिवाजी को अपने पिता का दर्शन प्राप्त नहीं हुआ था। अन्त में धीरे धीरे शिवाजी के पिता माता में पुनः प्रेम हो गया। शाहजी ने शिवा की शादी कर दी और कुछ
जब उसी अवस्था में आजकल के बच्चे गलियों और बाजारों में खेलते फिरतें हैं। माताएं इस बात की चिन्ता भी नहीं करती कि उनका बालक कहां खेल रहा है? शिवाजी की माता अपने बच्चे को छिपाती थी और बड़ी सावधानी से उसको ऐसे स्थान पर रखती थी जहां से वह दुश्मनों के हाथ से बचा रहे। सन् 1636 ई. तक शिवाजी को अपने पिता का दर्शन प्राप्त नहीं हुआ था। अन्त में धीरे धीरे शिवाजी के पिता माता में पुनः प्रेम हो गया। शाहजी ने शिवा की शादी कर दी और कुछ