ने अपनी खोज और शोध के द्वारा सत्य पाया है। यह स्वीकार किया जा चुका है कि संस्कृत भाषा वर्तमान में प्रचलित इण्डो-आर्यन परिवार की भाषाओं की जननी है। इस परिवार में यूरोप की प्रायः अधिकांश भाषाओं के अलावा जें़द पुरानी फारसी तथा पश्तों आदि भाषांए भी सम्मिलित हैं। यह सम्भव है कि अन्य भाषाओं का मूल भी इसी संस्कृत भाषा को मान लिया जाये।
कालक्रम से भारत में अनेक मतों का प्रचलन हुआ। जिस बौद्व धर्म के अनुयायियों की संख्या इस विश्व में बहुत अधिक है,
ने अपनी खोज और शोध के द्वारा सत्य पाया है। यह स्वीकार किया जा चुका है कि संस्कृत भाषा वर्तमान में प्रचलित इण्डो-आर्यन परिवार की भाषाओं की जननी है। इस परिवार में यूरोप की प्रायः अधिकांश भाषाओं के अलावा जें़द पुरानी फारसी तथा पश्तों आदि भाषांए भी सम्मिलित हैं। यह सम्भव है कि अन्य भाषाओं का मूल भी इसी संस्कृत भाषा को मान लिया जाये।
कालक्रम से भारत में अनेक मतों का प्रचलन हुआ। जिस बौद्व धर्म के अनुयायियों की संख्या इस विश्व में बहुत अधिक है,