भाइयों को दे दी और तीेनों को अपनी सेवा में रख लिया।
निदान उसने बहुत ही थोड़े समय में बिना किसी प्रकार की लड़ाई के समस्त जागीर अपने हाथ में करली जो इस समय महल और कबरें बनाने के धुन में था। और इसका सेनापति शाहजी कर्नाटक की लड़ाई में था और घूम घूम कर दौरा कर रहा था।
अध्याय 3
शाहजी का कैद होना और छुटकारा
21 वर्ष की अवस्था तक जो कार्य शिवाजी ने किये हैं वह ऊपर लिखे जा चुके हैं। स्वतन्त्रता और राजपाट की प्रबल अभिलाषा ने
भाइयों को दे दी और तीेनों को अपनी सेवा में रख लिया।
निदान उसने बहुत ही थोड़े समय में बिना किसी प्रकार की लड़ाई के समस्त जागीर अपने हाथ में करली जो इस समय महल और कबरें बनाने के धुन में था। और इसका सेनापति शाहजी कर्नाटक की लड़ाई में था और घूम घूम कर दौरा कर रहा था।
अध्याय 3
शाहजी का कैद होना और छुटकारा
21 वर्ष की अवस्था तक जो कार्य शिवाजी ने किये हैं वह ऊपर लिखे जा चुके हैं। स्वतन्त्रता और राजपाट की प्रबल अभिलाषा ने