इस समय तक मुगलों के राज्य में हाथ नहीं डाला था इसलिए दूरदर्शिता से लाभ उठाने के लिए शाहजहंा से पत्र व्यवहार शुरू किया। जिसका फल यह हुआ कि शाहजहां ने आदिलशाह को शाहजी के अपराधों को क्षमा कर देने के लिए बाध्य किया और शिवाजी को पांच हजारी का पद देना स्वीकार किया। शाहजहां की कृपा और मुरार पन्त के प्रयत्न से शाहजी कैद से छूट गये और चार वर्ष तक दरबार में रहे।
शिवाजी की गिरफ्तारी का प्रयन्त
जब तक शिवाजी के पिता शाहजी दरबार
इस समय तक मुगलों के राज्य में हाथ नहीं डाला था इसलिए दूरदर्शिता से लाभ उठाने के लिए शाहजहंा से पत्र व्यवहार शुरू किया। जिसका फल यह हुआ कि शाहजहां ने आदिलशाह को शाहजी के अपराधों को क्षमा कर देने के लिए बाध्य किया और शिवाजी को पांच हजारी का पद देना स्वीकार किया। शाहजहां की कृपा और मुरार पन्त के प्रयत्न से शाहजी कैद से छूट गये और चार वर्ष तक दरबार में रहे।
शिवाजी की गिरफ्तारी का प्रयन्त
जब तक शिवाजी के पिता शाहजी दरबार