जब शिवाजी को पिता शाहजी के कैद होने का समाचार मिला तो बड़ी चिन्ता उपस्थित हुई। एक ओर तो पिता का जीवन संकट में और दूसरी और वर्षो की कड़ी मेहनत की कमाई कीर्ति और सम्पत्ति नष्ट होती थी और स्वतन्त्रता की आशा लता, जिसमें फल आने ही वाला था, सूखी जाती थी। शिवाजी इसी उधेड़ बुन में था कि बुद्विमती स्त्री ने समझााया कि क्षमा-प्रार्थना के अतिरिक्त स्वतन्त्रता से जो कार्यवाही की जायेगी वह शाहजी के लिए अधिक लाभदायक होगी। शिवाजी ने
जब शिवाजी को पिता शाहजी के कैद होने का समाचार मिला तो बड़ी चिन्ता उपस्थित हुई। एक ओर तो पिता का जीवन संकट में और दूसरी और वर्षो की कड़ी मेहनत की कमाई कीर्ति और सम्पत्ति नष्ट होती थी और स्वतन्त्रता की आशा लता, जिसमें फल आने ही वाला था, सूखी जाती थी। शिवाजी इसी उधेड़ बुन में था कि बुद्विमती स्त्री ने समझााया कि क्षमा-प्रार्थना के अतिरिक्त स्वतन्त्रता से जो कार्यवाही की जायेगी वह शाहजी के लिए अधिक लाभदायक होगी। शिवाजी ने