रहता था वहां ताक में रहने लगा। शिवाजी को इसकी ख़बर लग गई। उसने स्वयं ’बाजी’ और उसके साथियों पर आक्रमण करके जंगल में खदेड़ दिया। जावली के राजा चन्द्रराव ने इस विश्वासघाती को अपने राज्य में होकर जाने दिया था।
शिवाजी ने भरपूर कोशिश की कि राजा को इस बात पर राजी करें कि मुसलमानों के विरूद्व अपने देश को स्वतन्त्र करने के लिए तैयार हो परन्तु जावली के राजा चन्द्रराव ने शिवाजी की कोई बात न सुनी बल्कि विरूद्व में उस पार्टी की
रहता था वहां ताक में रहने लगा। शिवाजी को इसकी ख़बर लग गई। उसने स्वयं ’बाजी’ और उसके साथियों पर आक्रमण करके जंगल में खदेड़ दिया। जावली के राजा चन्द्रराव ने इस विश्वासघाती को अपने राज्य में होकर जाने दिया था।
शिवाजी ने भरपूर कोशिश की कि राजा को इस बात पर राजी करें कि मुसलमानों के विरूद्व अपने देश को स्वतन्त्र करने के लिए तैयार हो परन्तु जावली के राजा चन्द्रराव ने शिवाजी की कोई बात न सुनी बल्कि विरूद्व में उस पार्टी की