किया और उसके आदमियों ने तब तक अधीनता का नाम भी नहीं लिया था जब
50 छत्रपति शिवाजी
तक कि ’बन्दल’ लड़ता हुआ मारा न गया। अन्त में किला शिवाजी के हाथ आया और मुकाबला करने वालों में से देशमुख बाजी बड़े सम्मान से मिला। शिवाजी ने उसको उसके पिता के सम्पूर्ण अधिकार दे दिये और उसे अपनी अधीनता में रख लिया और एक पैदल सेना की बड़ी संख्या उसको दी गई जिसे पाकर उसने अपनी बाकी आयु बड़ी भक्ति के साथ शिवाजी की सेवा में व्यतीत की।
’नीर’
किया और उसके आदमियों ने तब तक अधीनता का नाम भी नहीं लिया था जब
50 छत्रपति शिवाजी
तक कि ’बन्दल’ लड़ता हुआ मारा न गया। अन्त में किला शिवाजी के हाथ आया और मुकाबला करने वालों में से देशमुख बाजी बड़े सम्मान से मिला। शिवाजी ने उसको उसके पिता के सम्पूर्ण अधिकार दे दिये और उसे अपनी अधीनता में रख लिया और एक पैदल सेना की बड़ी संख्या उसको दी गई जिसे पाकर उसने अपनी बाकी आयु बड़ी भक्ति के साथ शिवाजी की सेवा में व्यतीत की।
’नीर’