छत्रपति शिवाजी - Chhatrapati Shivaji

के सूबेदार के पास जाता है। वह बेचारा इस बेइमानी को न समझ सका। कुतुबशाह को इन बातों का तभी पता लगा जब शाहजादा मुहम्मद सुलतान उसके द्वार पर जा पहुंचा। विवश होकर कुतुबशाह ने अत्यन्त दीन भाव से सन्धि कर ली और एक करोड़ रूपया वार्षिक देना स्वीकार कर लिया। मीरजुमला दिल्ली दरबार में बुला लिया गया और इसे मन्त्री का पद दिया गया। इस बीच में मुहम्मद आदिलशाह ( बीजापुर का बादशाह) ता. 9 नवम्बर 1656 ई. को मर गया। दाराशिकोेह के द्वारा


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के सूबेदार के पास जाता है। वह बेचारा इस बेइमानी को न समझ सका। कुतुबशाह को इन बातों का तभी पता लगा जब शाहजादा मुहम्मद सुलतान उसके द्वार पर जा पहुंचा। विवश होकर कुतुबशाह ने अत्यन्त दीन भाव से सन्धि कर ली और एक करोड़ रूपया वार्षिक देना स्वीकार कर लिया। मीरजुमला दिल्ली दरबार में बुला लिया गया और इसे मन्त्री का पद दिया गया। इस बीच में मुहम्मद आदिलशाह ( बीजापुर का बादशाह) ता. 9 नवम्बर 1656 ई. को मर गया। दाराशिकोेह के द्वारा


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