कोंकण प्रान्त पर अधिकार जमाने की आज्ञा औरंगजेब ने दे दी। उसके वास्तविक अधिकारों के विषय में बाजी ’सोनदेव’ को दरबार में भेजना निश्चय हुआ िकवह दरबार में जाकर इस बात की चर्चा चलावें। शिवाजी को इसने आज्ञा भेजी तथा शेष सेना से राजमण्डल का प्रबन्ध करे। शिवाजी तथा औरंगजेब एक दूसरे को खूब जानते थे किन्तु ऐसा ज्ञात होता है कि वह पत्र-व्यवहार यहां तक रहा और आगे कोई फल नहीं हुआ अर्थात् कोई विशेष प्रतिज्ञा नहीं हुई। शिवाजी ने ’कोंकण’
कोंकण प्रान्त पर अधिकार जमाने की आज्ञा औरंगजेब ने दे दी। उसके वास्तविक अधिकारों के विषय में बाजी ’सोनदेव’ को दरबार में भेजना निश्चय हुआ िकवह दरबार में जाकर इस बात की चर्चा चलावें। शिवाजी को इसने आज्ञा भेजी तथा शेष सेना से राजमण्डल का प्रबन्ध करे। शिवाजी तथा औरंगजेब एक दूसरे को खूब जानते थे किन्तु ऐसा ज्ञात होता है कि वह पत्र-व्यवहार यहां तक रहा और आगे कोई फल नहीं हुआ अर्थात् कोई विशेष प्रतिज्ञा नहीं हुई। शिवाजी ने ’कोंकण’