छत्रपति शिवाजी 55
ज्माने की आज्ञा चाही तथा अपने पुराने अनुचर को पेश किया और बारी बारी से ’रघुनाथ’ और ’कृष्णजी भास्कर’ नामक वकीलों को मुगल दरबार में भेजा।
औरंगजेब इस समय राजपुतों से लड़ रहा था। उसने भी अपना अहोभाग्य समझा कि शिवाजी की तरफ से चिन्ता दूर हो। इसके सिवाय उसने यह सोचा कि यदि शिवाजी और आदिलशाह परस्पर लड़ते रहेंगे तो दोनों में से कोई भी मुगल साम्राज्य पर धावा न कर सकेंगे और परस्पर एक दूसरे की शक्ति क्षीण कर देंगे। फलस्वरूप शिवाजी को,
छत्रपति शिवाजी 55
ज्माने की आज्ञा चाही तथा अपने पुराने अनुचर को पेश किया और बारी बारी से ’रघुनाथ’ और ’कृष्णजी भास्कर’ नामक वकीलों को मुगल दरबार में भेजा।
औरंगजेब इस समय राजपुतों से लड़ रहा था। उसने भी अपना अहोभाग्य समझा कि शिवाजी की तरफ से चिन्ता दूर हो। इसके सिवाय उसने यह सोचा कि यदि शिवाजी और आदिलशाह परस्पर लड़ते रहेंगे तो दोनों में से कोई भी मुगल साम्राज्य पर धावा न कर सकेंगे और परस्पर एक दूसरे की शक्ति क्षीण कर देंगे। फलस्वरूप शिवाजी को,