इन पठानों का नायक नियुक्त किया गया। शिवाजी के मन्त्रियों में सब से उच्च अधिकार शामरावजी पन्त का था। ’कोंकण’ की विजय प्राप्ति के लिए एक बहुत बड़ी सेना एकत्रित करके उसको प्रबन्धकर्ता नियत किया गया, परन्तु
56 छत्रपति शिवाजी
परीक्षा से यह निश्चय हो गया िकवह सेना का नायक होने की योग्यता नहीं रखता है। फलस्वरूप उस नायक को बीजापुर की सेना के सम्मुख हारना पड़ा जिससे शिवाजी को अत्यन्त क्लेश हुआ। यह पहली हार थी यद्यपि वह स्वयं
इन पठानों का नायक नियुक्त किया गया। शिवाजी के मन्त्रियों में सब से उच्च अधिकार शामरावजी पन्त का था। ’कोंकण’ की विजय प्राप्ति के लिए एक बहुत बड़ी सेना एकत्रित करके उसको प्रबन्धकर्ता नियत किया गया, परन्तु
56 छत्रपति शिवाजी
परीक्षा से यह निश्चय हो गया िकवह सेना का नायक होने की योग्यता नहीं रखता है। फलस्वरूप उस नायक को बीजापुर की सेना के सम्मुख हारना पड़ा जिससे शिवाजी को अत्यन्त क्लेश हुआ। यह पहली हार थी यद्यपि वह स्वयं