उस पराजय का उत्तरदाता न था। अतएव शामरावजी़ पन्त को पीछे बुला लिया गया और नायक पद से पृथक् कर दिया गया और उसके स्थान पर ’रघुनाथ पन्त’ यद्यपि स्वयं रणभूमि से पीछे नहीं हटा परन्तु अपने विरोधी की भी नहीं हटा सका। अन्त को वर्षा ऋतु के आरम्भ होने से दोनों सेनाएं संग्राम-भूमि से पीछे हट गई। इस समय एक और बलवान् शत्रु शिवाजी के सामने आया।
अध्याय 5
अफजल खां की घटना
बीजापुर के शासक ने इस समय अनुमान लगाया कि शिवाजी को अधीन
उस पराजय का उत्तरदाता न था। अतएव शामरावजी़ पन्त को पीछे बुला लिया गया और नायक पद से पृथक् कर दिया गया और उसके स्थान पर ’रघुनाथ पन्त’ यद्यपि स्वयं रणभूमि से पीछे नहीं हटा परन्तु अपने विरोधी की भी नहीं हटा सका। अन्त को वर्षा ऋतु के आरम्भ होने से दोनों सेनाएं संग्राम-भूमि से पीछे हट गई। इस समय एक और बलवान् शत्रु शिवाजी के सामने आया।
अध्याय 5
अफजल खां की घटना
बीजापुर के शासक ने इस समय अनुमान लगाया कि शिवाजी को अधीन