कि मरहठा लेखकों का वर्णन किया हुआ इतिहास इस विषय में ’खाफीकी खां’ के इस लेख की अपेक्षा सत्य और ठीक है। जिसे पढ़ते समय तत्काल निश्चय हो जाता है िकवह पक्षपात-पूर्ण तथा मिथ्या है क्योंकि यह कभी सम्भव नहीं हो सकता िकइस सलूक के पश्चात् (जो कि शिवाजी के साथ दरबार बीजापुर की ओर से काम में आया था और उस विरोध के पश्चात् जिसे शिवाजी ने बीजापुर के राज्य के विरूद्व खड़ा किया था) अफ़ज़ल खां शिवाजी पर पूर्ण विश्वास करके मित्र भाव से इस
कि मरहठा लेखकों का वर्णन किया हुआ इतिहास इस विषय में ’खाफीकी खां’ के इस लेख की अपेक्षा सत्य और ठीक है। जिसे पढ़ते समय तत्काल निश्चय हो जाता है िकवह पक्षपात-पूर्ण तथा मिथ्या है क्योंकि यह कभी सम्भव नहीं हो सकता िकइस सलूक के पश्चात् (जो कि शिवाजी के साथ दरबार बीजापुर की ओर से काम में आया था और उस विरोध के पश्चात् जिसे शिवाजी ने बीजापुर के राज्य के विरूद्व खड़ा किया था) अफ़ज़ल खां शिवाजी पर पूर्ण विश्वास करके मित्र भाव से इस