(परन्तु शिवाजी के बदन पर जो सज्जो आदि वस्त्र थे उसके कारण तलवार कुछ कार्य न कर सकी) तो शिवाजी ने अत्यन्त चतुरता के साथ बायें हाथ में लगा हुआ बिछूआ (बघनखा) अफ़ज़ल खां की आंतड़ियों में घुसेड़ दिया। अफ़ज़ल खां वहीं ढेर हो गया। उसका शरीर एक पहाड़ी पर दबा दिया तथा उसके सिर पर एक बुर्ज बनवा दिया जो अब भी वहां पर मौजुद है और ’अब्दुल्ला का मीनार’ के नाम से प्रसिद्व है। अफ़ज़ल खां का असली नाम अब्दुल्ला था।
थ्वचार करने से ज्ञात होता है
(परन्तु शिवाजी के बदन पर जो सज्जो आदि वस्त्र थे उसके कारण तलवार कुछ कार्य न कर सकी) तो शिवाजी ने अत्यन्त चतुरता के साथ बायें हाथ में लगा हुआ बिछूआ (बघनखा) अफ़ज़ल खां की आंतड़ियों में घुसेड़ दिया। अफ़ज़ल खां वहीं ढेर हो गया। उसका शरीर एक पहाड़ी पर दबा दिया तथा उसके सिर पर एक बुर्ज बनवा दिया जो अब भी वहां पर मौजुद है और ’अब्दुल्ला का मीनार’ के नाम से प्रसिद्व है। अफ़ज़ल खां का असली नाम अब्दुल्ला था।
थ्वचार करने से ज्ञात होता है