भाषा में अनेक ग्रन्थ नष्ट हो गये है और यही कारण है कि इतिहास के लेखकों के द्वारा भी अनेक भूलें हुई हैं। जब संस्कृत के लेखकों के द्वारा भी भूलों का होना सम्भव है तो उन लोगों का तो कहना ही क्या, जो इस भाषा को अशिक्षित लोगों की भाषा मानते हैं तथा जिनकी धारणा है कि आर्य जाति ने उन्नति के पथ पर चलना कभी सीखा ही नहीं था।
हिन्दू जाति की उन्नति के बारे में पश्चिम के विद्वानों ने बहुत कुछ लिखा है किन्तू मुसलमान लेखकों का इस ओर
भाषा में अनेक ग्रन्थ नष्ट हो गये है और यही कारण है कि इतिहास के लेखकों के द्वारा भी अनेक भूलें हुई हैं। जब संस्कृत के लेखकों के द्वारा भी भूलों का होना सम्भव है तो उन लोगों का तो कहना ही क्या, जो इस भाषा को अशिक्षित लोगों की भाषा मानते हैं तथा जिनकी धारणा है कि आर्य जाति ने उन्नति के पथ पर चलना कभी सीखा ही नहीं था।
हिन्दू जाति की उन्नति के बारे में पश्चिम के विद्वानों ने बहुत कुछ लिखा है किन्तू मुसलमान लेखकों का इस ओर