10 छत्रपति शिवाजी
ध्यान कम गया है। पाश्चात्य विद्वानों के भी दो प्रकार के लेख मिलते हैं। प्रथम कोटि में वे लोग हैं जिन्होंने पक्षपातरहित होकर लिखा है, यद्यपि इनकी संख्या कम है। इन लोगों में भी वे लोग और भी कम हैं जो हमारी जाति के प्रति सहानुभूति रखकर लिख सके हैं। खेद इस बात का है कि इस कोटि के ग्रन्थों तक हमारे विद्यार्थियों की पहुंच बहुत कम है। आज जो इतिहास पढ़ाये जाते हैं वे इतने विचित्र हैं कि उनके सिर, पैर का कुछ
10 छत्रपति शिवाजी
ध्यान कम गया है। पाश्चात्य विद्वानों के भी दो प्रकार के लेख मिलते हैं। प्रथम कोटि में वे लोग हैं जिन्होंने पक्षपातरहित होकर लिखा है, यद्यपि इनकी संख्या कम है। इन लोगों में भी वे लोग और भी कम हैं जो हमारी जाति के प्रति सहानुभूति रखकर लिख सके हैं। खेद इस बात का है कि इस कोटि के ग्रन्थों तक हमारे विद्यार्थियों की पहुंच बहुत कम है। आज जो इतिहास पढ़ाये जाते हैं वे इतने विचित्र हैं कि उनके सिर, पैर का कुछ