और वे सामना करने की तैयारियां करने लगे। ’बहशी गुलामसीदी जौहर’ को आज्ञा मिली कि सेना लेकर आगे बढ़े और अफ़ज़ल खां का पुत्र ’फाज़िलखां’ जो अपने पिता का बदला शिवाजी से चुकाना चाहता था उसके सााि हो लिया (दोनों को आज्ञा मिली कि ’पलाना’ किला) (जो अभी थोड़े दिन पहले शिवाजी ने प्राप्त किया था) उस पर आक्रमण करें। देसरी तरफ से फतेहखां को आज्ञा दी गई । ’सीदी जौहर’ को सलावतखां की पदवी दी गई। शिवाजी ने भी युद्व की तैयारी आरम्भ कर दी और
और वे सामना करने की तैयारियां करने लगे। ’बहशी गुलामसीदी जौहर’ को आज्ञा मिली कि सेना लेकर आगे बढ़े और अफ़ज़ल खां का पुत्र ’फाज़िलखां’ जो अपने पिता का बदला शिवाजी से चुकाना चाहता था उसके सााि हो लिया (दोनों को आज्ञा मिली कि ’पलाना’ किला) (जो अभी थोड़े दिन पहले शिवाजी ने प्राप्त किया था) उस पर आक्रमण करें। देसरी तरफ से फतेहखां को आज्ञा दी गई । ’सीदी जौहर’ को सलावतखां की पदवी दी गई। शिवाजी ने भी युद्व की तैयारी आरम्भ कर दी और