छत्रपति शिवाजी - Chhatrapati Shivaji

’रघुननाथपन्त’ को आज्ञा दी कि फतेहखां का सामना करे तथा ’आबाजी सोनदेव’ कल्याण भभेरी के किले पर तैनात किये गये। ’भाऊजी पालकर’ को आज्ञा मिली िकवे बारी के सामन्त लोगों का सामना करे। पूर्णधर, संगर व प्रतापगढ़ और आस पास के इलाके की रक्षा के लिए ’मोरोपन्त’ को रखा गया और स्वयं शिवाजी ’पलाना किले’ की रक्षा में कटिबद्व हो गये। शिवाजी ने बीजापुर की सेना को आगे बढ़ने से नहीं रोका परन्तु जब सेना दुर्ग के पास आ डटी तो ’नेता जी पालकर’


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’रघुननाथपन्त’ को आज्ञा दी कि फतेहखां का सामना करे तथा ’आबाजी सोनदेव’ कल्याण भभेरी के किले पर तैनात किये गये। ’भाऊजी पालकर’ को आज्ञा मिली िकवे बारी के सामन्त लोगों का सामना करे। पूर्णधर, संगर व प्रतापगढ़ और आस पास के इलाके की रक्षा के लिए ’मोरोपन्त’ को रखा गया और स्वयं शिवाजी ’पलाना किले’ की रक्षा में कटिबद्व हो गये। शिवाजी ने बीजापुर की सेना को आगे बढ़ने से नहीं रोका परन्तु जब सेना दुर्ग के पास आ डटी तो ’नेता जी पालकर’


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