ने इसके पहले पूरा प्रबन्ध कर दिया था। अर्थात् इस आपत्ति को हटाने के लिए अपने ’मावली’ साथियों का एक समूह मार्ग में छोड़ दिया था जिसका प्रबन्ध बाजीराव देशपाण्डे के आधीन था। जब पीछा करने वाले मुसलमान आ पहंुचे तो उनके साथ सेना बहुत अधिक थी तथा मरहठे संख्या में बहुत कम थे। शिवाजी ने आज्ञा दी थी कि जब तक (हमारी ओर से) पांच गोलियां न चलें तब तक लड़ते रहना और अमुक दिशा में लगातार पांच गोलियां चल जाये तो समझ लेना कि हम सुख से किले
ने इसके पहले पूरा प्रबन्ध कर दिया था। अर्थात् इस आपत्ति को हटाने के लिए अपने ’मावली’ साथियों का एक समूह मार्ग में छोड़ दिया था जिसका प्रबन्ध बाजीराव देशपाण्डे के आधीन था। जब पीछा करने वाले मुसलमान आ पहंुचे तो उनके साथ सेना बहुत अधिक थी तथा मरहठे संख्या में बहुत कम थे। शिवाजी ने आज्ञा दी थी कि जब तक (हमारी ओर से) पांच गोलियां न चलें तब तक लड़ते रहना और अमुक दिशा में लगातार पांच गोलियां चल जाये तो समझ लेना कि हम सुख से किले