छत्रपति शिवाजी - Chhatrapati Shivaji

पता नहीं लगता। जिन स्वदेशी विद्वानों ने हमारे देश का इतिहास लिखा उन्होंने भी स्वंय का अनुसंधान न करके पाश्चात्य विद्वानों का ही अनुसरण किया है। यही कारण है कि हमारा इतिहास अभी तक अधूरा है। हिन्दू सन्तान और हिन्दू विद्यार्थियों का यह कत्र्तव्य है कि वे इस कमी को पूरा करें। जब तक यह कार्य नहीं हो जाता तब तक उपलब्ध अनुसंधान के आधार पर ही ऐसा इतिहास लिखा जाना चाहिए जो पक्षपात शून्य हो और योग्य लेखकों के कठिन परिश्रम का सार हो,


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पता नहीं लगता। जिन स्वदेशी विद्वानों ने हमारे देश का इतिहास लिखा उन्होंने भी स्वंय का अनुसंधान न करके पाश्चात्य विद्वानों का ही अनुसरण किया है। यही कारण है कि हमारा इतिहास अभी तक अधूरा है। हिन्दू सन्तान और हिन्दू विद्यार्थियों का यह कत्र्तव्य है कि वे इस कमी को पूरा करें। जब तक यह कार्य नहीं हो जाता तब तक उपलब्ध अनुसंधान के आधार पर ही ऐसा इतिहास लिखा जाना चाहिए जो पक्षपात शून्य हो और योग्य लेखकों के कठिन परिश्रम का सार हो,


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