का सन्देह हो गया था। अतएव दोनों में मनमुटाव हो जाने के कारण अन्त में बादशाह स्वयं रणक्षेत्र में उतरा तो ’सीदीजौहर’ ने क्षमा मांगी। यद्यपित ब भी ’सीदीजौहर’ के दिल में ऐसा भय समाया हुआ था कि बादशाह के सामने आने की हिम्मत न पड़ी और वन्दन शिष्टाचार करके चला गया। जब बादशाह कृष्णा नदी के तट पर ठहरा हुआ था तो उसने सन्देश भेज कर सीदीजौहर को बुलाया। यद्यपि ’सीदीजौहर’ आया और वन्दन शिष्टाचार करके चला गया परन्तु इब्राहिम खां को जो
का सन्देह हो गया था। अतएव दोनों में मनमुटाव हो जाने के कारण अन्त में बादशाह स्वयं रणक्षेत्र में उतरा तो ’सीदीजौहर’ ने क्षमा मांगी। यद्यपित ब भी ’सीदीजौहर’ के दिल में ऐसा भय समाया हुआ था कि बादशाह के सामने आने की हिम्मत न पड़ी और वन्दन शिष्टाचार करके चला गया। जब बादशाह कृष्णा नदी के तट पर ठहरा हुआ था तो उसने सन्देश भेज कर सीदीजौहर को बुलाया। यद्यपि ’सीदीजौहर’ आया और वन्दन शिष्टाचार करके चला गया परन्तु इब्राहिम खां को जो