तो ’मोरपन्त’ को बनाया और घुड़सवार सेना की बागडोर ’नेताजी पालकर’ के हाथ में थमा दी और आज्ञा दी कि मुगलिया मण्डल को नष्ट भ्रष्ट करके अपना राज्य निष्कण्टक बनाने के लिए कार्य आरम्भ कर दो। फलस्वरूप् ’नेताजी’ औरंगाबाद तक लूट खसोट करके लौट आये और पूना में विश्राम किया। जब यह सब समाचार औरंगजेब को मिला तो क्रोधित होकर ’शायस्ता खां’ मुखिया को आज्ञा दी कि तत्काल एक महती फौज लेकर इस उजड्ड तथा धूर्त मरहठे की दुर्गति कर दे और उसके सम्पूर्ण
तो ’मोरपन्त’ को बनाया और घुड़सवार सेना की बागडोर ’नेताजी पालकर’ के हाथ में थमा दी और आज्ञा दी कि मुगलिया मण्डल को नष्ट भ्रष्ट करके अपना राज्य निष्कण्टक बनाने के लिए कार्य आरम्भ कर दो। फलस्वरूप् ’नेताजी’ औरंगाबाद तक लूट खसोट करके लौट आये और पूना में विश्राम किया। जब यह सब समाचार औरंगजेब को मिला तो क्रोधित होकर ’शायस्ता खां’ मुखिया को आज्ञा दी कि तत्काल एक महती फौज लेकर इस उजड्ड तथा धूर्त मरहठे की दुर्गति कर दे और उसके सम्पूर्ण