छत्रपति शिवाजी - Chhatrapati Shivaji



शिवाजी ने विचार किया कि कुछ धन एकत्रित करना चाहिए क्यांेकि लगातार संग्रामों और दौरों से उसकी सेना को माल हाथ लगने का कोई भी अवसर नहीं मिला था। इसलिए अपने साथियों में यह प्रसिद्व कर दिया कि मैं नासिक के मन्दिर में दर्शन करने के लिए जा रहा हूं परन्तू चुपचाप 4000 सवार लेकर जनवरी सन् 1664 ई. में ’सूरत’ पर चढ़ाई कर दी। सूरत उन दिनों खूब दौलत से भरा था। छः दिनों तक शिवाजी ने बराबर शाही शहर को लूटा और बहुत सा माल लेकर अपने रायगढ़ के किले में, जो कि


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शिवाजी ने विचार किया कि कुछ धन एकत्रित करना चाहिए क्यांेकि लगातार संग्रामों और दौरों से उसकी सेना को माल हाथ लगने का कोई भी अवसर नहीं मिला था। इसलिए अपने साथियों में यह प्रसिद्व कर दिया कि मैं नासिक के मन्दिर में दर्शन करने के लिए जा रहा हूं परन्तू चुपचाप 4000 सवार लेकर जनवरी सन् 1664 ई. में ’सूरत’ पर चढ़ाई कर दी। सूरत उन दिनों खूब दौलत से भरा था। छः दिनों तक शिवाजी ने बराबर शाही शहर को लूटा और बहुत सा माल लेकर अपने रायगढ़ के किले में, जो कि


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