छत्रपति शिवाजी - Chhatrapati Shivaji

था और इस लेखन के बदले उन्हें भरपूर पारितोषिक मिलता था। इन इतिहासों में कदम कदम पर पक्षपात और आत्मप्रशंसा के चिन्ह दिखाई पड़ते हैं। ऐसे ग्रन्थों को लिखने के लिए बादशाहों के द्वारा लेखकों को मजबूर किया जाता था। इन ग्रन्थों में मुसलमानों की वीरता, हिम्मत

विज्ञप्ति 11

और विजय के वृत्तान्त को अतिश्योक्तिपूर्ण ढंग से लिखा जाता था। ये लोग जहां हिन्दुओं के विजय का समाचार लिखते तो उसका कारण चालाकी या चालबाजी बता देते थे। अनेक


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था और इस लेखन के बदले उन्हें भरपूर पारितोषिक मिलता था। इन इतिहासों में कदम कदम पर पक्षपात और आत्मप्रशंसा के चिन्ह दिखाई पड़ते हैं। ऐसे ग्रन्थों को लिखने के लिए बादशाहों के द्वारा लेखकों को मजबूर किया जाता था। इन ग्रन्थों में मुसलमानों की वीरता, हिम्मत

विज्ञप्ति 11

और विजय के वृत्तान्त को अतिश्योक्तिपूर्ण ढंग से लिखा जाता था। ये लोग जहां हिन्दुओं के विजय का समाचार लिखते तो उसका कारण चालाकी या चालबाजी बता देते थे। अनेक


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