छत्रपति शिवाजी - Chhatrapati Shivaji

स्थानों पर हिन्दुओं को काफिर और कमजोर जैसे निन्दास्पद शब्दों से सम्बोधित किया गया है। यदि अंगे्रज जैसी सभ्य जाति के लोग भी अपनी मातृभूमि के लिए प्राणों तक को न्यौछावर करने वालों को डाकू कहने में नहीं सकुचाते तो इन मुसलमान लेखकों को क्या दोष दें? देशप्रेमी लोगों को दोहरी लड़ाई लड़नी पड़ती है। प्रथम अपनी जाति के अधीन नहीं हो सकती जब तक कि उसमें अपने ही देश के साथ घात करने वाले देशद्रोही पैदा न हो। ऐसे देशद्रोही देश का उद्वार


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स्थानों पर हिन्दुओं को काफिर और कमजोर जैसे निन्दास्पद शब्दों से सम्बोधित किया गया है। यदि अंगे्रज जैसी सभ्य जाति के लोग भी अपनी मातृभूमि के लिए प्राणों तक को न्यौछावर करने वालों को डाकू कहने में नहीं सकुचाते तो इन मुसलमान लेखकों को क्या दोष दें? देशप्रेमी लोगों को दोहरी लड़ाई लड़नी पड़ती है। प्रथम अपनी जाति के अधीन नहीं हो सकती जब तक कि उसमें अपने ही देश के साथ घात करने वाले देशद्रोही पैदा न हो। ऐसे देशद्रोही देश का उद्वार


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