छत्रपति शिवाजी - Chhatrapati Shivaji

जाने वाले एक जहाज को लूट लिया है। औरंगजेब को बड़ा क्रोध आया और उसने शपथ खाई कि जब तक उस टेढ़े नेत्र वाले अभिमानी हिन्दू का सिर न काट लूंगा तब तक चैन नहीं लूंगा। परन्तु ईश्वर की लाला ईश्वर के सिवा कौन जान सकता है क्योंकि न तो औरंगजेब सर्वशक्तिमान् था और न उसे इन बातों का ही ज्ञान था।

अध्याय 7

महाराजा शिवाजी के अन्य कार्य

अगस्त सन् 1665 ई. में शिवाजी फिर अपने शत्रु को परास्त करने के लिए रवाना हुए और पहले ’’पटहव-अहमद


235 of 401

जाने वाले एक जहाज को लूट लिया है। औरंगजेब को बड़ा क्रोध आया और उसने शपथ खाई कि जब तक उस टेढ़े नेत्र वाले अभिमानी हिन्दू का सिर न काट लूंगा तब तक चैन नहीं लूंगा। परन्तु ईश्वर की लाला ईश्वर के सिवा कौन जान सकता है क्योंकि न तो औरंगजेब सर्वशक्तिमान् था और न उसे इन बातों का ही ज्ञान था।

अध्याय 7

महाराजा शिवाजी के अन्य कार्य

अगस्त सन् 1665 ई. में शिवाजी फिर अपने शत्रु को परास्त करने के लिए रवाना हुए और पहले ’’पटहव-अहमद


235 of 401