छत्रपति शिवाजी - Chhatrapati Shivaji

(जो किलेदार भी था) ’बाजी प्रभु’ था। उसके अधीन मरहठा सेना ने बड़ी उत्तमता से इस बात को सिद्व कर दिया कि रणभूमि से भाग कर प्राण रक्षा करने या संग्राम से घबड़ा भाग जाने या बिना किसी प्रकार का मुकाबला किये शस्त्र छोड़ देने अथवा किले को खाली कर देने की कलंक कालिमा अपने शिर पर लगाना सम्भव नहीं है।

दिलेर खां किले की तरफ बढ़ा। उधर से ’बाजीप्रभु’ ने भी निर्भय हो कर उत्साह और गम्भीरता से युद्व करने की आज्ञा दे दी।

किले के बाहर


244 of 401

(जो किलेदार भी था) ’बाजी प्रभु’ था। उसके अधीन मरहठा सेना ने बड़ी उत्तमता से इस बात को सिद्व कर दिया कि रणभूमि से भाग कर प्राण रक्षा करने या संग्राम से घबड़ा भाग जाने या बिना किसी प्रकार का मुकाबला किये शस्त्र छोड़ देने अथवा किले को खाली कर देने की कलंक कालिमा अपने शिर पर लगाना सम्भव नहीं है।

दिलेर खां किले की तरफ बढ़ा। उधर से ’बाजीप्रभु’ ने भी निर्भय हो कर उत्साह और गम्भीरता से युद्व करने की आज्ञा दे दी।

किले के बाहर


244 of 401