जागीर का (5 लाख पगोड़ा प्रति वर्ष) प्राप्त हो इन अधिकारों के बदले 3 लाख वार्षिक की किस्त से 40 लाख ’पगोड़ा’ की भेंट शाही कोष में देने की प्रतिज्ञा की गई।
राजा जयसिंह ने इन शर्तो को पूरा करने के लिए अपने ऊपर भार लिया। औरंगजेब ने इसके उत्तर में जो पत्र लिखा था उसमें उसने भी शर्ते स्वीकार की थी। ’देशमुखी’ अधिकार जो चैथी शर्त में था औरंगजेब ने उसका कहीं जिकर भी नहीं किया था। हां, पहली शर्त अवश्य मान ली थी। इनके सिवाय औरंगजेब
जागीर का (5 लाख पगोड़ा प्रति वर्ष) प्राप्त हो इन अधिकारों के बदले 3 लाख वार्षिक की किस्त से 40 लाख ’पगोड़ा’ की भेंट शाही कोष में देने की प्रतिज्ञा की गई।
राजा जयसिंह ने इन शर्तो को पूरा करने के लिए अपने ऊपर भार लिया। औरंगजेब ने इसके उत्तर में जो पत्र लिखा था उसमें उसने भी शर्ते स्वीकार की थी। ’देशमुखी’ अधिकार जो चैथी शर्त में था औरंगजेब ने उसका कहीं जिकर भी नहीं किया था। हां, पहली शर्त अवश्य मान ली थी। इनके सिवाय औरंगजेब