डालना कहते हैं। जब आजकल की सभ्य जातियों का यह सच है तो हम मुसलमान लेखकों को क्यों दोष दें?
यह सब तो प्रसंगवश लिखना पड़ा। वास्तविक प्रश्न यह है कि हम अपने अवनति के इतिहास को कहां से पढ़ना शुरू करें? प्रथम तो हमें इन कारणों का विचार करना होगा जिनसे हम इस अधोगति को प्राप्त हुए। फिर यह भी सोचना होगा िकइस समय तक हम अधोगति के गहरे गढ़े में क्यों पड़े हैं, यह और भी दुर्भाग्य की बात है कि मुसलमान लेखकों
12 छत्रपति शिवाजी
के
डालना कहते हैं। जब आजकल की सभ्य जातियों का यह सच है तो हम मुसलमान लेखकों को क्यों दोष दें?
यह सब तो प्रसंगवश लिखना पड़ा। वास्तविक प्रश्न यह है कि हम अपने अवनति के इतिहास को कहां से पढ़ना शुरू करें? प्रथम तो हमें इन कारणों का विचार करना होगा जिनसे हम इस अधोगति को प्राप्त हुए। फिर यह भी सोचना होगा िकइस समय तक हम अधोगति के गहरे गढ़े में क्यों पड़े हैं, यह और भी दुर्भाग्य की बात है कि मुसलमान लेखकों
12 छत्रपति शिवाजी
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