करने वाले लोगों के मार्ग में बाधक बनते हैं। आवश्यकता इस बात की है कि देशद्रोहियों का बल न बढ़ने पाए ज्यों ही ये सर उठाएं, उनको कुचल दिया जाये। इस प्रकार देश के उद्वारक ऐसे काम भी करते हैं जिससे देशद्रोहियों का विनाश हो। ऐसा करने में उनका स्वार्थ नहीं होता, अपितू वे शत्रु की शक्ति को नष्ट करने के लिए ही ऐसे काम करते हैं। योरोपियन सेनापति इन कामों को कत्र्तव्य समझ कर करते हैं, किन्तू अन्य लोग उस कार्यवाही को लूटपाट या डाका
करने वाले लोगों के मार्ग में बाधक बनते हैं। आवश्यकता इस बात की है कि देशद्रोहियों का बल न बढ़ने पाए ज्यों ही ये सर उठाएं, उनको कुचल दिया जाये। इस प्रकार देश के उद्वारक ऐसे काम भी करते हैं जिससे देशद्रोहियों का विनाश हो। ऐसा करने में उनका स्वार्थ नहीं होता, अपितू वे शत्रु की शक्ति को नष्ट करने के लिए ही ऐसे काम करते हैं। योरोपियन सेनापति इन कामों को कत्र्तव्य समझ कर करते हैं, किन्तू अन्य लोग उस कार्यवाही को लूटपाट या डाका