अत्यन्त घृणा की दृष्टि से देखता था परन्तु साथ ही इस बात का भी यत्न करता था कि वे खुले रूप से इसके शत्रु न बन जायें। औरंगजेब हिन्दू राजाओं को प्रायः ऐसे स्थानों में भेजा करता था जहां से उनके जीते जी आने की आशा नहीं रहती थी। इसके सिवा एक और अविश्वास
90 छत्रपति शिवाजी
मनहानि की गई। राजा जयसिंह दक्षिण की लड़ाई से लौट कर न आ सके अर्थात् रास्ते ही में मर गये। अब एक और राजपूत वीर की बारी आई कि वह औरंगजेब के हाथ लगे तथा उसके
अत्यन्त घृणा की दृष्टि से देखता था परन्तु साथ ही इस बात का भी यत्न करता था कि वे खुले रूप से इसके शत्रु न बन जायें। औरंगजेब हिन्दू राजाओं को प्रायः ऐसे स्थानों में भेजा करता था जहां से उनके जीते जी आने की आशा नहीं रहती थी। इसके सिवा एक और अविश्वास
90 छत्रपति शिवाजी
मनहानि की गई। राजा जयसिंह दक्षिण की लड़ाई से लौट कर न आ सके अर्थात् रास्ते ही में मर गये। अब एक और राजपूत वीर की बारी आई कि वह औरंगजेब के हाथ लगे तथा उसके