सहायता के लिए प्रतिज्ञा की परन्तु खुले तौर पर उसके पास आने से साफ इन्कार कर दिया।
शिवाजी एक बार मुग़लराज्य के धोखे में अपने प्राण संकट में डाल चके थे। अब यह कभी सम्भव नहीं था कि उन जैसा विचाराशील मनुष्य फिर अपने आप को आपित्त में फंसा देता। परन्तु शाह मुअज्जम की सेवा में अमीर अफसर जिसमें बहुत से हिन्दू भी शामिल थे, इस बनावटी चक्रव्यूह में आ गये जिसका यह फल हुआ कि वे लोग बहुत से छल एंव कपटों के साथ औरंगजेब को सौंप दिये
सहायता के लिए प्रतिज्ञा की परन्तु खुले तौर पर उसके पास आने से साफ इन्कार कर दिया।
शिवाजी एक बार मुग़लराज्य के धोखे में अपने प्राण संकट में डाल चके थे। अब यह कभी सम्भव नहीं था कि उन जैसा विचाराशील मनुष्य फिर अपने आप को आपित्त में फंसा देता। परन्तु शाह मुअज्जम की सेवा में अमीर अफसर जिसमें बहुत से हिन्दू भी शामिल थे, इस बनावटी चक्रव्यूह में आ गये जिसका यह फल हुआ कि वे लोग बहुत से छल एंव कपटों के साथ औरंगजेब को सौंप दिये