कितनी है इसके लिए इस योग्य अंगे्रज लेखक का यह कथन ही काफी है।
ख़ाफी खां एक अन्य लेखक है जिसके लिखे इतिहास से पर्याप्त सहायता ली जा सकती है। उसने जहां भी हिन्दू वीरों की कथा कही उन्हें घृणास्पद शब्दों से सम्बोधित किया। क्या ऐसे इतिहास ग्रन्थों से हम अपने बच्चों को वास्तविकता से परिचित करा सकते है? सच तो यह है कि आजकल जो इतिहास पढ़ाया जाता है वह किसी स्वतन्त्र अनुसंधान के आधार पर नहीं लिखा गया। अतः आवश्यकता इस बात की है
कितनी है इसके लिए इस योग्य अंगे्रज लेखक का यह कथन ही काफी है।
ख़ाफी खां एक अन्य लेखक है जिसके लिखे इतिहास से पर्याप्त सहायता ली जा सकती है। उसने जहां भी हिन्दू वीरों की कथा कही उन्हें घृणास्पद शब्दों से सम्बोधित किया। क्या ऐसे इतिहास ग्रन्थों से हम अपने बच्चों को वास्तविकता से परिचित करा सकते है? सच तो यह है कि आजकल जो इतिहास पढ़ाया जाता है वह किसी स्वतन्त्र अनुसंधान के आधार पर नहीं लिखा गया। अतः आवश्यकता इस बात की है