कि हिन्दू स्वयम् अपने अनुसंधान के आधार पर अपना इतिहास लिखें और उन पुस्तकों से भी सहायता लें जो सच्चाई को प्रस्तुत करती हैं।
इस खोज में हमें हिन्दू लेखकों द्वारा लिखे गये कुछ
विज्ञप्ति 13
ऐसे भी इतिहास मिलेंगे जो मुसलमानों द्वारा लिखें गये इतिहासों से भी निम्नकोटी के हैं। कारण कि जिस लेखक ने केवल किसी को खुश करने के लिए ही जो लिखा उसका ध्यान सच्चाई की ओर नहीं रहेगा। उसका ध्यान तो खुद को मिलने वाले पुरस्कार की ओर
कि हिन्दू स्वयम् अपने अनुसंधान के आधार पर अपना इतिहास लिखें और उन पुस्तकों से भी सहायता लें जो सच्चाई को प्रस्तुत करती हैं।
इस खोज में हमें हिन्दू लेखकों द्वारा लिखे गये कुछ
विज्ञप्ति 13
ऐसे भी इतिहास मिलेंगे जो मुसलमानों द्वारा लिखें गये इतिहासों से भी निम्नकोटी के हैं। कारण कि जिस लेखक ने केवल किसी को खुश करने के लिए ही जो लिखा उसका ध्यान सच्चाई की ओर नहीं रहेगा। उसका ध्यान तो खुद को मिलने वाले पुरस्कार की ओर