दिल्लीश्वर से सन्धि कर ली और साथ ही शिवाजी से सन्धि करके तीन लाख रूपया वार्षिक कर देना स्वीकार कर लिया। इस प्रकार आदिलशाह ने 5 लाख रूपया वार्षिक स्वीकार कर के सुलह कर ली। सन् 1667 ई. तक शिवाजी अपने राज्य के प्रबन्ध में लगे रहे जिसके कारण लगभग दो वर्ष तक किसी के साथ कोई युद्व नहीं हुआ।
अध्याय 11
मुग़ल सम्राट से मुकाबला-सिंहगढ़ की लड़ाई ताना जी का बलिदान
सन् 1670 ई. में औरंगजेब ने दक्षिण के सूबेदार को दूसरी आज्ञा भेजी
दिल्लीश्वर से सन्धि कर ली और साथ ही शिवाजी से सन्धि करके तीन लाख रूपया वार्षिक कर देना स्वीकार कर लिया। इस प्रकार आदिलशाह ने 5 लाख रूपया वार्षिक स्वीकार कर के सुलह कर ली। सन् 1667 ई. तक शिवाजी अपने राज्य के प्रबन्ध में लगे रहे जिसके कारण लगभग दो वर्ष तक किसी के साथ कोई युद्व नहीं हुआ।
अध्याय 11
मुग़ल सम्राट से मुकाबला-सिंहगढ़ की लड़ाई ताना जी का बलिदान
सन् 1670 ई. में औरंगजेब ने दक्षिण के सूबेदार को दूसरी आज्ञा भेजी