रखते थे परन्तु गुण की गुण की पहचान करने में तो कमाल ही करते थे। शत्रुओं को मित्र और विश्वसनीय बना लेते थे। बहुत से योग्य, वीर और साहसी मनुष्य उनके साथ रहे, लड़े और इनमें से बहुत से उनकी उच्च बुद्विमत्ता के कायल होकर उनके ऊपर प्राण निछावर करने वाले सिपाही तथा अफसर बने। श्विाजी की सफलता का यही एक मुख्य कारण था। सन् 1667-68 में सुलतान मुअज्जम तथा शिवाजी में घनिष्ठ मित्रता रही। सन् 1668 के मध्य बीजापुर के बादशाह आदिलशाह ने
रखते थे परन्तु गुण की गुण की पहचान करने में तो कमाल ही करते थे। शत्रुओं को मित्र और विश्वसनीय बना लेते थे। बहुत से योग्य, वीर और साहसी मनुष्य उनके साथ रहे, लड़े और इनमें से बहुत से उनकी उच्च बुद्विमत्ता के कायल होकर उनके ऊपर प्राण निछावर करने वाले सिपाही तथा अफसर बने। श्विाजी की सफलता का यही एक मुख्य कारण था। सन् 1667-68 में सुलतान मुअज्जम तथा शिवाजी में घनिष्ठ मित्रता रही। सन् 1668 के मध्य बीजापुर के बादशाह आदिलशाह ने