जब तक वह किला फतह न करोगे तब तक तुम्हारा राज्य और तुम्हारी शक्ति अधुरी है। माताजी की यह बात सुन कर शिवाजी पर वज्रपात हुआ, कान्ति उड़ गई। उदासीनता छा गई और कहा-
माताजी ! यह बड़ा कठिन वर है। यह किसका साहस है कि शूरवीर उदयभानु का सामना कर सके। माताजी ! जो कुछ मेरा है वह आप ले सकती हैं परन्तु जो वस्तु मेरी नहीं उसके विषय में मैं कैसे प्रतिज्ञज्ञ कर सकता हूं।
माताजी- (अत्यन्त क्रुद्व होकर) बेटा! याद रक्खो, माता का शाप बहुत
जब तक वह किला फतह न करोगे तब तक तुम्हारा राज्य और तुम्हारी शक्ति अधुरी है। माताजी की यह बात सुन कर शिवाजी पर वज्रपात हुआ, कान्ति उड़ गई। उदासीनता छा गई और कहा-
माताजी ! यह बड़ा कठिन वर है। यह किसका साहस है कि शूरवीर उदयभानु का सामना कर सके। माताजी ! जो कुछ मेरा है वह आप ले सकती हैं परन्तु जो वस्तु मेरी नहीं उसके विषय में मैं कैसे प्रतिज्ञज्ञ कर सकता हूं।
माताजी- (अत्यन्त क्रुद्व होकर) बेटा! याद रक्खो, माता का शाप बहुत