जो कुछ आज्ञा हो भेंट करूं। किले, माल, धन सब कुछ विद्यमान है जो चाहिए ले लीजिए।
छत्रपति शिवाजी 97
माताजी-बेटा ! न तो तेरे किले की मुझे चाह है न माल धन और न किसी अन्य वस्तु की। केवल एक ही वर मांगती हूं और प्रतिज्ञा करो कि पूर्ण करोगे?
शिवाजी-माताजी अच्छा! अब आज्ञा दीजिए।
माताजी-बेटा! क्मर बांधो, तलवार म्यान से निकालो। यह सिंहगढ़ का किला मेरे नेत्रों में खटक रहा है। उस पर विजय प्राप्त कर माता के हृदय को शान्ति दो।
जो कुछ आज्ञा हो भेंट करूं। किले, माल, धन सब कुछ विद्यमान है जो चाहिए ले लीजिए।
छत्रपति शिवाजी 97
माताजी-बेटा ! न तो तेरे किले की मुझे चाह है न माल धन और न किसी अन्य वस्तु की। केवल एक ही वर मांगती हूं और प्रतिज्ञा करो कि पूर्ण करोगे?
शिवाजी-माताजी अच्छा! अब आज्ञा दीजिए।
माताजी-बेटा! क्मर बांधो, तलवार म्यान से निकालो। यह सिंहगढ़ का किला मेरे नेत्रों में खटक रहा है। उस पर विजय प्राप्त कर माता के हृदय को शान्ति दो।