और तानाजी की जागीर में जा पहुंचा। क्या देखा कि चारों तरफ आनन्द और प्रसन्नता के दृश्य दिखलाई पड़ रहे हैं। पूछने पर ज्ञात हुआ कि तानाजी के पुत्र ’रायबा’ के यज्ञोपवीत तथा विवाह संस्कार की तैयारियां हो रही हैं। दूत ने सम्पूर्ण बन्धुओं तथा सेनाध्यक्षों के सामने तानाजी को शिवाजी का पत्र दिया। जिस समय तानाजी ने शिवाजी का पत्र पढ़ा तो तानाजी का चचा शेलरजी इस प्रकार बोल उठा। तानाजी! सिंहगढ़ का विजय करना सुगम नहीं है, जितने भी मनुष्य
और तानाजी की जागीर में जा पहुंचा। क्या देखा कि चारों तरफ आनन्द और प्रसन्नता के दृश्य दिखलाई पड़ रहे हैं। पूछने पर ज्ञात हुआ कि तानाजी के पुत्र ’रायबा’ के यज्ञोपवीत तथा विवाह संस्कार की तैयारियां हो रही हैं। दूत ने सम्पूर्ण बन्धुओं तथा सेनाध्यक्षों के सामने तानाजी को शिवाजी का पत्र दिया। जिस समय तानाजी ने शिवाजी का पत्र पढ़ा तो तानाजी का चचा शेलरजी इस प्रकार बोल उठा। तानाजी! सिंहगढ़ का विजय करना सुगम नहीं है, जितने भी मनुष्य