न था कि उदयभानु के फुसलाने से युद्व से विमुख हो जाता।
तानाजी ने कहा, यदि लड़ाई का साहस नहीं हो तो
104 छत्रपति शिवाजी
शस्त्र छोड़ो और गले में पगड़ी डाल कर मेरे साथ चलो। मैं प्रतिज्ञा करता हूं कि शिवाजी तुमसे अच्छी तरह से पेश आयेंगे। परन्तु उदयभानु ने अपने घमण्ड के वशीभूत हो उस पर कुछ ध्यान न देकर अपनी तलवार का वार तानाजी पर किया बस फिर क्या था! बत की बात में दोनों के वार होने लगे। बहुत बड़ी लड़ाई के बाद मैदान में तानाजी मारा गया।
न था कि उदयभानु के फुसलाने से युद्व से विमुख हो जाता।
तानाजी ने कहा, यदि लड़ाई का साहस नहीं हो तो
104 छत्रपति शिवाजी
शस्त्र छोड़ो और गले में पगड़ी डाल कर मेरे साथ चलो। मैं प्रतिज्ञा करता हूं कि शिवाजी तुमसे अच्छी तरह से पेश आयेंगे। परन्तु उदयभानु ने अपने घमण्ड के वशीभूत हो उस पर कुछ ध्यान न देकर अपनी तलवार का वार तानाजी पर किया बस फिर क्या था! बत की बात में दोनों के वार होने लगे। बहुत बड़ी लड़ाई के बाद मैदान में तानाजी मारा गया।