ही पठान भी गिर कर स्वर्गलोक को चला गया इस प्रकार उदयभानु के सब अफसर और बेटे बारी बारी से मारे गये। जब उदयभानु ने देखा कि इस प्रकार कुछ काम नहीं बनता है तो किले में रक्खी तमाम रूई और तेल में आग लगा दी। प्रकाश होने पर उदयभानु को पता लगा कि तानाजी की सेना बहुत थोड़ी है। बस फिर क्या था? शेर के समान गरजा और तानाजी के सामने आ डटा और तानाजी की तारीफ कर के उसे फुसलाने लगा। तानाजी भी उसके प्रश्न का यथोचित उत्तर देते रहे। वह नमकहराम
ही पठान भी गिर कर स्वर्गलोक को चला गया इस प्रकार उदयभानु के सब अफसर और बेटे बारी बारी से मारे गये। जब उदयभानु ने देखा कि इस प्रकार कुछ काम नहीं बनता है तो किले में रक्खी तमाम रूई और तेल में आग लगा दी। प्रकाश होने पर उदयभानु को पता लगा कि तानाजी की सेना बहुत थोड़ी है। बस फिर क्या था? शेर के समान गरजा और तानाजी के सामने आ डटा और तानाजी की तारीफ कर के उसे फुसलाने लगा। तानाजी भी उसके प्रश्न का यथोचित उत्तर देते रहे। वह नमकहराम