छत्रपति शिवाजी - Chhatrapati Shivaji

ने सुना कि तानाजी मारा गया तो अत्यन्त शोक में होकर कहने लगे कि तानाजी मारा गया तो अत्यन्त शोक में होकर कहने लगे कि हा शोक! सिंहगढ़’ तो हाथ आया परन्तु ’सिंह’ हाथ से जाता रहा।

शिवाजी ने इस विजय के उपलक्ष्य में अपनी प्रथा के विरूद्व सम्पूर्ण सिपाहियों को चांदी के पुरस्कार दिये। ’सवायजी’ को इस किले का अध्यक्ष नियत किया। उन्होंने एक मास के अन्दर ’पूर्णधर’ किले को विजय कर लिया।

छत्रपति शिवाजी 105

यह कार्यवाही मार्च सन् 1667 ई. में हुई।


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ने सुना कि तानाजी मारा गया तो अत्यन्त शोक में होकर कहने लगे कि तानाजी मारा गया तो अत्यन्त शोक में होकर कहने लगे कि हा शोक! सिंहगढ़’ तो हाथ आया परन्तु ’सिंह’ हाथ से जाता रहा।

शिवाजी ने इस विजय के उपलक्ष्य में अपनी प्रथा के विरूद्व सम्पूर्ण सिपाहियों को चांदी के पुरस्कार दिये। ’सवायजी’ को इस किले का अध्यक्ष नियत किया। उन्होंने एक मास के अन्दर ’पूर्णधर’ किले को विजय कर लिया।

छत्रपति शिवाजी 105

यह कार्यवाही मार्च सन् 1667 ई. में हुई।


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