की आज्ञा दे 40000 सेना के साथ महावतखां को शिवाजी का सामना करने के लिए भेजा। औरंगजेब को शंका थी कि सुल्तान मुअज्जम शिवाजी से मेल रखता है और इसमें कुछ भी सन्देह नहीं कि यदि सचमुच यह बात शिवाजी और जसवन्तसिंह जी के मध्य थी तभी जसवन्तसिंह ने शिवाजी को कष्ट देने के लिए उत्साह नहीं दिखाया।
महावतखां ने दक्षिण पहुंचकर तुरन्त किलों को घेरना आरम्भ कर दिया परन्तु सन् 1662 ई. की वर्षाऋतु तक ’औंडा’ और ’पटा’ नाम के दो ही किले वापस
की आज्ञा दे 40000 सेना के साथ महावतखां को शिवाजी का सामना करने के लिए भेजा। औरंगजेब को शंका थी कि सुल्तान मुअज्जम शिवाजी से मेल रखता है और इसमें कुछ भी सन्देह नहीं कि यदि सचमुच यह बात शिवाजी और जसवन्तसिंह जी के मध्य थी तभी जसवन्तसिंह ने शिवाजी को कष्ट देने के लिए उत्साह नहीं दिखाया।
महावतखां ने दक्षिण पहुंचकर तुरन्त किलों को घेरना आरम्भ कर दिया परन्तु सन् 1662 ई. की वर्षाऋतु तक ’औंडा’ और ’पटा’ नाम के दो ही किले वापस