छत्रपति शिवाजी - Chhatrapati Shivaji



पर्याय नहीं कहा जा सकता । यदि अंगे्रज जाति में हक्सले और डारविन जैसे दार्शनिकों के होने पर भी वीरता आ सकती है तथा अफलातून प्लेटो अरस्तु, हेगल, शिलर, गेटे, मिल्टन तथा शाॅपनहार जैसे दार्शनिकों और कवियों को उत्पन्न करने वाली जातियों में भी वीर हो सकते हैं तो कोई कारण नहीं कि दार्शनिकों को उत्पन्न करने वाली हिन्दू जाति में वीर न हुए हों। ईसा की इस शिक्षा के रहने पर भी कि ’’कोई तुम्हारे एक गाल पर थप्पड़ मारे तो दूसरा भी उसके सामने कर दो।’’


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पर्याय नहीं कहा जा सकता । यदि अंगे्रज जाति में हक्सले और डारविन जैसे दार्शनिकों के होने पर भी वीरता आ सकती है तथा अफलातून प्लेटो अरस्तु, हेगल, शिलर, गेटे, मिल्टन तथा शाॅपनहार जैसे दार्शनिकों और कवियों को उत्पन्न करने वाली जातियों में भी वीर हो सकते हैं तो कोई कारण नहीं कि दार्शनिकों को उत्पन्न करने वाली हिन्दू जाति में वीर न हुए हों। ईसा की इस शिक्षा के रहने पर भी कि ’’कोई तुम्हारे एक गाल पर थप्पड़ मारे तो दूसरा भी उसके सामने कर दो।’’


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