ईसाई जातियां बहादुर रह सकती है और मुसलमान लोग सूफियों के अद्वैतवाद की शिक्षा का प्रचार करते हुए भी वीर और उत्साही रह सकते है तो कोई कारण नहीं कि हिन्दू अपने विज्ञान और दर्शन के कारण अपनी वीरता खो बैठें। यह कहना तो केवल हेत्वाभास है। ऊपर जो कुछ कहा गया वह विपक्षियों के आधार पर कहा गया। उनकी राय हमारे लिए इसलिए लाभदायक है क्योंकि उन पर हमारे पक्षपाती होने का आरोप तो कदापि नहीं लग सकता। जो जाति अपने पतन के युग में भी राजा कर्ण,
ईसाई जातियां बहादुर रह सकती है और मुसलमान लोग सूफियों के अद्वैतवाद की शिक्षा का प्रचार करते हुए भी वीर और उत्साही रह सकते है तो कोई कारण नहीं कि हिन्दू अपने विज्ञान और दर्शन के कारण अपनी वीरता खो बैठें। यह कहना तो केवल हेत्वाभास है। ऊपर जो कुछ कहा गया वह विपक्षियों के आधार पर कहा गया। उनकी राय हमारे लिए इसलिए लाभदायक है क्योंकि उन पर हमारे पक्षपाती होने का आरोप तो कदापि नहीं लग सकता। जो जाति अपने पतन के युग में भी राजा कर्ण,