प्रतापराव इस अप्रसन्नता के कारण ’बरापांघाट’ के प्रान्त में चला गया जिससे फिर अब्दुलकरीम को साहस हो आया और उसने बहुत सी सेना इकट्ठी करके पनाला को फिर से विजय करना चाहा। फरवरी सन् 1643 में यह धावा प्रारम्भ हुआ। अब्दुलकरीम की सेना किले के पास पहुंची ही थी कि प्रतापराव अपनी सेना सहित उधर से आ निकला। मालूम होने पर शिवाजी ने प्रतापराव को लिख भेजा कि जब तक तू मुसलमानी सेना का विध्वंस करके बहुत सा धन लूट नहीं लावेगा तब तक मैं
प्रतापराव इस अप्रसन्नता के कारण ’बरापांघाट’ के प्रान्त में चला गया जिससे फिर अब्दुलकरीम को साहस हो आया और उसने बहुत सी सेना इकट्ठी करके पनाला को फिर से विजय करना चाहा। फरवरी सन् 1643 में यह धावा प्रारम्भ हुआ। अब्दुलकरीम की सेना किले के पास पहुंची ही थी कि प्रतापराव अपनी सेना सहित उधर से आ निकला। मालूम होने पर शिवाजी ने प्रतापराव को लिख भेजा कि जब तक तू मुसलमानी सेना का विध्वंस करके बहुत सा धन लूट नहीं लावेगा तब तक मैं