तेरा मुंह नहीं देखना चाहता। प्रतापराव ने इस अनादर को दूर करने के लिए एक महती सेना के साथ बीजापुर पर चढ़ाई कर दी। यद्यपि प्रतापराव बड़ी वीरता से लड़ा परन्तु युद्व में मारा गया और उसकी सेना हताश होकर भागने लगी। मुसलमानों ने समझा कि मरहठी सेना समाप्त हो चुकी है अतएव उन्होंने पीछा करना शुरू किया। इतने में ’मुशाहजी’ पांच हजार सिपाही लेकर आ पहुंचा और मुसलमानी सेना जो पीछा कर रही थी अपने प्राण बचा कर भाग निकली। बेचारे अब्दुलकरीम
तेरा मुंह नहीं देखना चाहता। प्रतापराव ने इस अनादर को दूर करने के लिए एक महती सेना के साथ बीजापुर पर चढ़ाई कर दी। यद्यपि प्रतापराव बड़ी वीरता से लड़ा परन्तु युद्व में मारा गया और उसकी सेना हताश होकर भागने लगी। मुसलमानों ने समझा कि मरहठी सेना समाप्त हो चुकी है अतएव उन्होंने पीछा करना शुरू किया। इतने में ’मुशाहजी’ पांच हजार सिपाही लेकर आ पहुंचा और मुसलमानी सेना जो पीछा कर रही थी अपने प्राण बचा कर भाग निकली। बेचारे अब्दुलकरीम