पर नियत कर दिया। बदले में उसने दिलेरखां को बहुत सा रूपया देने की प्रतिज्ञा की और यह भी कहा कि वह कभी शिवाजी से सन्धि न करेगा अब्दुलकरीम के मरने के पश्चात् सेना का बहुत सा वेतन बाकी था। फलस्वरूप धीरे धीरे सेना घट चली।
जिस समय यह समाचार शिवाजी को मिला तो रघुनाथ नारायण और सेनापति ’भीमराव’ को कर्नाटक में छोड़ कर वापस चले आये। मार्ग में भी विजय पर विजय करते आये। कई किले उस समय उनके हाथ आये। जिस समय शिवाजी ’तुर्गल’ पहुंचे
पर नियत कर दिया। बदले में उसने दिलेरखां को बहुत सा रूपया देने की प्रतिज्ञा की और यह भी कहा कि वह कभी शिवाजी से सन्धि न करेगा अब्दुलकरीम के मरने के पश्चात् सेना का बहुत सा वेतन बाकी था। फलस्वरूप धीरे धीरे सेना घट चली।
जिस समय यह समाचार शिवाजी को मिला तो रघुनाथ नारायण और सेनापति ’भीमराव’ को कर्नाटक में छोड़ कर वापस चले आये। मार्ग में भी विजय पर विजय करते आये। कई किले उस समय उनके हाथ आये। जिस समय शिवाजी ’तुर्गल’ पहुंचे