का मुकाबला करना व्यर्थ है। उसका भाग्य बढ़ा चढ़ा है। अन्त में पिता की धन सम्पत्ति और भूमि आदि में भाग देना भी स्वीकार कर लिया। इस प्रकार से विजयी शिवाजी 1 साल 6 माह के पश्चात् अपने रायगढ़ किले में जा पहुंचे।
उधर दुनकाजी से सन्धि हो जाने के कारण हेमराव भी वापस आया और समीप पहुंच कर उसने जनार्दनपन्त की सम्पत्ति से बीजापुर की सेना पर धावा कर दिया। इसमें शत्रु को अधिक हानि उठानी पड़ी। पांच सौ घोड़े, पांच हाथी और शत्रु का सेनाध्यक्ष
का मुकाबला करना व्यर्थ है। उसका भाग्य बढ़ा चढ़ा है। अन्त में पिता की धन सम्पत्ति और भूमि आदि में भाग देना भी स्वीकार कर लिया। इस प्रकार से विजयी शिवाजी 1 साल 6 माह के पश्चात् अपने रायगढ़ किले में जा पहुंचे।
उधर दुनकाजी से सन्धि हो जाने के कारण हेमराव भी वापस आया और समीप पहुंच कर उसने जनार्दनपन्त की सम्पत्ति से बीजापुर की सेना पर धावा कर दिया। इसमें शत्रु को अधिक हानि उठानी पड़ी। पांच सौ घोड़े, पांच हाथी और शत्रु का सेनाध्यक्ष