उनके हाथ आया। बेचारा बीजापुर न इधर का रहा न उधर का। मुग़ल सेना के भरोसे पर ही इसने शिवाजी से युद्व छेड़ा था। उधर मुसलमान मुग़ल सहायकों की यह दशा
छत्रपति शिवाजी 115
हुई कि जिस समय औरंगजेब को उस प्रबन्ध का समाचार मिला जो कि दिलेर खां ने मसऊदखां से किया था तो उसने इस प्रबन्ध को अस्वीकार कर दिया और दिलेर खां को आज्ञा दी कि बीजापुर की सेना को वेतन देकर उसको बस में कर ले और बीजापुर में राजकीय अधिकार जमा ले। अन्त को मसऊदखां
उनके हाथ आया। बेचारा बीजापुर न इधर का रहा न उधर का। मुग़ल सेना के भरोसे पर ही इसने शिवाजी से युद्व छेड़ा था। उधर मुसलमान मुग़ल सहायकों की यह दशा
छत्रपति शिवाजी 115
हुई कि जिस समय औरंगजेब को उस प्रबन्ध का समाचार मिला जो कि दिलेर खां ने मसऊदखां से किया था तो उसने इस प्रबन्ध को अस्वीकार कर दिया और दिलेर खां को आज्ञा दी कि बीजापुर की सेना को वेतन देकर उसको बस में कर ले और बीजापुर में राजकीय अधिकार जमा ले। अन्त को मसऊदखां